श्री के पी सिंह की पुस्तक "Playing From the Front" का विमोचन - Nai Ummid
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श्री के पी सिंह की पुस्तक "Playing From the Front" का विमोचन


रत्नेश कुमार
दिसंबर, 2020, को डॉ अर्जुन राम मेघवाल जी, माननीय, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री, भारत सरकार,प्रो.पी सी जोशी,माननीय उपकुलपति, दिल्ली विश्वविद्यालय एवं सभी गणमान्य बुद्धिजीवी वर्गो की गरिमामय उपस्थिति में दिल्ली विश्वविद्यालय के स्वर्णिम इतिहास में एक नए गौरवशाली और ऐतिहासिक अध्याय की शुरुआत, हमारे विश्वविद्यालय के पुस्तकालय एवं सूचना विभाग  के सबसे अत्यधिक लोकप्रिय, प्रो. श्री के पी सिंह जी की बहुत ही रोचक, सारगर्भित, एक अनूठा और अनुपम, पुस्तक जिसका शीर्षक है" Playing From the Front"के पुस्तक विमोचन के माध्यम से हो रही है। डॉ के पी सिंह जी भारत एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुस्तकालय एवं सूचना विभाग को एक नई ऊंचाइयों तक ले जाने का दूसरा नाम है। डॉक्टर के पी सिंह जी एक दक्ष लाइब्रेरियन, शिक्षक, शिक्षक एक्टिविस्ट, जिज्ञासु शोधकर्ता, एक महान बुद्धिजीवी, प्रशासक और कई राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय  सम्मेलन को सफलतापूर्वक आयोजन करने वाले एक कुशल संगठन कर्ता भी हैं। आपने, अपने 22 वर्षों के शिक्षण कार्यकाल में अब तक तकरीबन 20 पुस्तकें, 150 शोध पत्रों, कई पुस्तकों में चैप्टर प्रकाशित करवाया है। 10 से ज्यादा पीएचडी थीसिस, 30 एम.फिल शोध पत्र आपके कुशल मार्गदर्शन में लिखा गया है। वर्तमान में आप दिल्ली विश्वविद्यालय में सहयोगी आचार्य और समन्वयक एकेडमिक और कल्चरल अफेयर्स, कला संकाय, दिल्ली विश्वविद्यालय में कार्यरत है। आप प्रतिष्ठित संस्था SRFLIS के अध्यक्ष और  DLA के महासचिव के पद पर सुशोभित है ।


आपके असाधारण मेहनत का ही प्रतिफल है,कि आप को लाइब्रेरी विज्ञान के क्षेत्र में कई प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया गया है,जिसमें कुछ प्रमुख है, SATKAL ,यंग लाइब्रेरियन अवार्ड 2011, DLA अवार्ड्स, 2017 और एशियन एकेडमिक लीडरशिप अवार्ड(  SAIARD),2020 हैं। 

कोविड-19 के अप्रत्याशित संकट के दौर में आपके द्वारा लिखी गई पुस्तक हमारे उन सभी फ्रंटलाइन से लड़ने वाले महान योद्धाओं को समर्पित है, जिन्होंने इस मुश्किल की असाधारण महान संकट के दौर में बिना, अपने जान के प्रवाह किए हुए लगातार समस्त भारतीयों के जीवन को बचाने के लिए देवदूत के रूप में आप सब लोगों ने एक मिसाल प्रस्तुत किया है।

आप जिस प्रकार से आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के विशालकाय व्यक्तित्व और अद्भुत निर्णय क्षमता से प्रभावित होकर, आपने मौजूदा संकट को एक अवसर के रूप में देखा और आप ने इस पुस्तक के माध्यम से लाइब्रेरी विज्ञान के महत्व, चुनौतियां और उसकी शक्तियों को अंतरराष्ट्रीय पटल पर ले जाने का एक सफल प्रयास किया है। डॉ के पी सिंह जी की रचना आने वाली सभी शोधार्थियों और बुद्धिजीवियों के लिए एक मिसाल प्रस्तुत करती है, कि किस प्रकार से हम विकसित भारत बनाने के लिए कितनी भी चुनौतियां क्यों न हो? उन चुनौतियों को ही अवसर में तब्दील किया जा सकता है, बशर्ते कि आपका इरादा, आपकी इच्छा शक्ति, आपका हौसला बुलंद हो। आपने जिस प्रकार से सोशल मीडिया और ऑनलाइन शिक्षण के माध्यम को शोध का एक नया प्लेटफार्म के रूप में विकसित किया। वह यह प्रदर्शित करता है कि सामान्य समय में भी अगर हम अपने सर्वश्रेष्ठ को देते रहे तो कोई भी चुनौती टिक नहीं पाएगी ।डॉ के पी सिंह जी आप और आपकी पूरी टीम बधाई की पात्र है। स्वयं आप भी COVID 19 से संक्रमित रहे उसके बावजूद भी, आपने लेखन के चुनौती को स्वीकार किया और आज, आपकी यह सर्वश्रेष्ठ रचना हम सबों के सामने हैं !

  


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